
Chapter 1 | 3 min read
ईटीएफ्स (ETFs) में निवेश: कम लागत वाले इन्वेस्टिंग (investing) के लिए एक शुरुआती गाइड (guide)
एक धूप भरी दोपहर में, राज अपनी दोस्त रिया से इन्वेस्टिंग के बारे में बात कर रहा था। "स्टॉक्स (stocks) रिस्की (risky) लगते हैं, और म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) महंगे लगते हैं," उसने माना। रिया ने समझदारी से मुस्कुराते हुए पूछा, "तूने कभी ईटीएफ्स (ETFs) के बारे में सोचा है?" राज थोड़ा उलझन में था, तो रिया ने समझाया, "ईटीएफ्स (ETFs) एक लो-कॉस्ट (low-cost) तरीका है इन्वेस्ट करने का, जो म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) और स्टॉक्स (stocks) का बेस्ट (best) कॉम्बिनेशन (combination) है। ये बिगिनर्स (beginners) के लिए परफेक्ट (perfect) हैं जो बिना बैंक तोड़े एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो (diversified portfolio) बनाना चाहते हैं।" उत्सुक होकर, राज ने ध्यान से सुना जब रिया ने शेयर किया कि कैसे ईटीएफ्स (ETFs) ने उसकी इन्वेस्टिंग जर्नी (investing journey) को सिंपल (simple) और अफोर्डेबल (affordable) बना दिया है।
चलो ईटीएफ्स (ETFs) के बारे में और जानें।
ईटीएफ्स (ETFs), या एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (exchange-traded funds), इन्वेस्टमेंट फंड्स (investment funds) का एक प्रकार हैं जो स्टॉक एक्सचेंजेज (stock exchanges) पर बिल्कुल इंडिविजुअल स्टॉक्स (individual stocks) की तरह ट्रेड होते हैं। आमतौर पर, ये एक बास्केट ऑफ एसेट्स (basket of assets) जैसे स्टॉक्स (stocks), बॉन्ड्स (bonds), या कमोडिटीज (commodities) को होल्ड करते हैं और किसी इंडेक्स (index) जैसे निफ्टी 50 (Nifty 50) या सेंसेक्स (Sensex) के परफॉर्मेंस को ट्रैक करने की कोशिश करते हैं। जब आप एक ईटीएफ (ETF) में इन्वेस्ट करते हैं, तो आप असल में उस डाइवर्सिफाइड बास्केट ऑफ एसेट्स (diversified basket of assets) का एक शेयर खरीद रहे होते हैं। यह एक सिंगल ट्रेड (single trade) के माध्यम से इंस्टेंट डाइवर्सिफिकेशन (instant diversification) के साथ विभिन्न प्रकार के इन्वेस्टमेंट्स का एक्सपोजर प्रदान करता है। म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) के विपरीत, जो दिन में एक बार ट्रेड होते हैं, एक ईटीएफ (ETF) को ट्रेडिंग डे (trading day) के दौरान किसी भी समय मार्केट प्राइस (market price) पर खरीदा या बेचा जा सकता है। इसका मतलब है कि आप अपने पोजीशन्स (positions) में कभी भी इन या आउट हो सकते हैं, जिससे ये ट्रेडिशनल फंड्स (traditional funds) की तुलना में काफी ज्यादा फ्लेक्सिबल (flexible) होते हैं।
ईटीएफ्स (ETFs) का एक मुख्य लाभ इसकी इनएक्सपेंसिवनेस (inexpensiveness) है। ज्यादातर ईटीएफ्स (ETFs) पैसिवली मैनेज्ड (passively managed) होते हैं, यानी वे केवल किसी इंडेक्स (index) के परफॉर्मेंस को ट्रैक करते हैं बजाय इसके कि उसे आउटपरफॉर्म (outperform) करने की कोशिश करें। इसका मतलब है कि उनमें लोअर मैनेजमेंट फीस (lower management fees) होती है एक्टिवली मैनेज्ड म्यूचुअल फंड्स (actively managed mutual funds) की तुलना में। क्योंकि ईटीएफ्स (ETFs) को डेली इन्वेस्टमेंट डिसीज़न्स (daily investment decisions) लेने के लिए फंड मैनेजर्स की टीम की जरूरत नहीं होती, उनके कॉस्ट्स (costs) आमतौर पर बहुत कम होते हैं, जो कॉस्ट-कॉन्शियस इन्वेस्टर्स (cost-conscious investors) को रिटर्न्स (returns) को मैक्सिमाइज (maximize) करने के लिए पसंद आएंगे।
ईटीएफ (ETF) का सबसे बड़ा लाभ डाइवर्सिफिकेशन (diversification) है। एक सिंगल ईटीएफ (single ETF) होल्डिंग में सैकड़ों स्टॉक्स (stocks) या बॉन्ड्स (bonds) के पोर्टफोलियो (portfolio) के साथ विभिन्न सेक्टर्स (sectors) और इंडस्ट्रीज (industries) का वाइड एक्सपोजर (wide exposure) प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, भारत की टॉप 50 कंपनियों का एक्सपोजर (exposure) निफ्टी 50 ईटीएफ (Nifty 50 ETF) से प्राप्त किया जा सकता है। इस तरह, रिस्क (risk) को एक बड़े एसेट्स (assets) के स्वाथ में फैलाया जाएगा। ऐसा कहा जा सकता है कि यह संभावित रिस्क्स (potential risks) को कम करने का एक उत्कृष्ट साधन बन सकता है जो सिंगल स्टॉक्स (single stocks) से जुड़े हो सकते हैं। आप इस ईटीएफ (ETF) के मालिक होंगे, अप्रत्यक्ष रूप से उन सभी कंपनियों में इन्वेस्ट करेंगे जो यह ईटीएफ (ETF) होल्ड करता है, और इस तरह आप हर स्टॉक (stock) को अलग से खरीदे बिना तुरंत डाइवर्सिफिकेशन (diversification) प्राप्त कर सकते हैं।
ईटीएफ्स (ETFs) भी म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) की तुलना में ज्यादा लिक्विड और फ्लेक्सिबल (more liquid and flexible) होते हैं। क्योंकि वे स्टॉक एक्सचेंजेज (stock exchanges) पर ट्रेड होते हैं, आप उन्हें जब भी मार्केट्स (markets) खुले हों, मौजूदा मार्केट प्राइसेस (market prices) पर किसी भी समय खरीद या बेच सकते हैं। यह क्विक और एफिशिएंट पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट्स (quick and efficient portfolio adjustments) को डील करने में काफी आसान बना देगा। यदि आप एक ज्यादा एक्टिव इन्वेस्टमेंट अप्रोच (active investment approach) ढूंढ रहे हैं, तो ईटीएफ्स (ETFs) आपको मार्केट मूवमेंट्स (market movements) पर ज्यादा आसानी से एक्ट करने की फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility) देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) की तुलना में जो केवल ट्रेडिंग डे (trading day) के अंत में एक बार प्राइस्ड होते हैं।
ईटीएफ्स (ETFs) की दूसरी विशेषता ट्रांसपेरेंसी (transparency) शामिल है: उनके होल्डिंग्स (holdings) दैनिक रूप से प्रकाशित होते हैं, इसलिए आपको पता होता है कि आप किसमें इन्वेस्ट कर रहे हैं। यह म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) के साथ यह कैसे कार्य करता है, इसके विपरीत है: साधारण म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) के साथ, जो होल्डिंग्स (holdings) को समय-समय पर प्रकाशित करते हैं, एक इन्वेस्टर इस ईटीएफ (ETF) को रियल-टाइम (real-time) में देखता है जो आपके इन्वेस्टमेंट को आवंटित एसेट मिक्स (asset mix) को दर्शाता है, और कैसे इस ईटीएफ (ETF) ने अच्छा प्रदर्शन किया और आपके इन्वेस्टमेंट ऑब्जेक्टिव (investment objective) के अनुरूप रहेगा।
भारत में ईटीएफ्स (ETFs) में इन्वेस्ट करना तुलनात्मक रूप से काफी आसान है। ईटीएफ्स (ETFs) में इन्वेस्ट करने के लिए, किसी को स्टॉकब्रोकर के साथ एक डिमैट और ट्रेडिंग अकाउंट (Demat and trading account) खोलना होगा। अकाउंट सेट अप करने के बाद, कोई भी आगे बढ़कर ईटीएफ्स (ETFs) को इंडिविजुअल स्टॉक्स (individual stocks) की तरह खरीद या बेच सकता है। विकल्प इक्विटी-बेस्ड ईटीएफ्स (equity-based ETFs), जो खासतौर पर स्टॉक्स (stocks) को दर्शाते हैं, से लेकर बॉन्ड ईटीएफ्स (bond ETFs) और कमोडिटी ईटीएफ्स (commodity ETFs) तक होते हैं। हमेशा पहले अपने फाइनेंशियल गोल्स (financial goals), रिस्क टॉलरेंस (risk tolerance), और इन्वेस्टमेंट होराइजन (investment horizon) का मूल्यांकन करना फायदेमंद होता है, ताकि अपने पोर्टफोलियो (portfolio) के लिए सही सेट ऑफ ईटीएफ्स (set of ETFs) का चयन कर सकें। यह भी एक बहुत कॉस्ट-इफेक्टिव (cost-effective) तरीके से वाइड रेंज ऑफ एसेट क्लासेज (wide range of asset classes) में इन्वेस्टमेंट्स को डाइवर्सिफाई (diversify) करने की सुविधा देता है।
निष्कर्ष
ईटीएफ्स (ETFs) सभी इन्वेस्टर्स (investors) के लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं, चाहे वह बिगिनर्स (beginners) हों या एक्सपर्ट्स (experts), जो लो फीस (low fees), फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility), और ट्रांसपेरेंसी (transparency) प्रदान करते हैं। वे एक डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो (diversified portfolio) बनाने में मदद करते हैं, रिस्क्स (risks) को कम करते हैं, और मिनिमल एफर्ट (minimal effort) के साथ पैसिव इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी (passive investment strategy) को फॉलो करते हैं। चाहे आप रिटायरमेंट (retirement) के लिए सेविंग कर रहे हों, वेल्थ (wealth) बढ़ा रहे हों, या बस शुरू कर रहे हों, ईटीएफ्स (ETFs) लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल सक्सेस (long-term financial success) के लिए एक आदर्श विकल्प हैं।
अगले चैप्टर में, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (Real Estate Investment Trusts) का पता लगाया जाएगा, जो रियल एस्टेट में डायरेक्ट ओनरशिप (direct ownership) लिए बिना इन्वेस्टमेंट के साधन हैं; वे डाइवर्सिफिकेशन (diversification) और स्टेडी इनकम (steady income) प्रदान करते हैं।
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